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भारत और चीन में सिंचाई के लिए पानी की बढ़ती मांग से गहराएगा भू-जल का संकट : यूएन रिपोर्ट

दुनिया के 15 शीर्ष भू-जल निकासी करने वाले देशों में अकेले सात देश एशिया और प्रशांत क्षेत्र में शामिल हैं। यूएन रिपोर्ट का अनुमान है कि 2050 तक भू-जल निकासी में 30 फीसदी बढ़त होगी।  

By Vivek Mishra

On: Tuesday 23 March 2021
 

एशिया और प्रशांत क्षेत्र दुनिया की 60 फीसदी आबादी का बसेरा है लेकिन इसमें महज 36 फीसदी आबादी के पास ही पानी के संसाधन है। इस क्षेत्र में ताजे पानी की आपूर्ति और अन्य कार्यों के लिए भू-जल पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। वहीं वर्ष 2050 तक भू-जल की निकासी 30 फीसदी तक बढ़ जाएगी। खासतौर से कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए लगातार जल की मांग बढ़ती जा रही है। उत्तरपश्चिमी भारत और उत्तरी चीन के मैदानों में सिंचाई के लिए जल की मांग में बढोत्तरी जारी है जिसके चलते गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। चीन और भारत के यह हिस्से खाद्य उत्पादन के लिए प्रमुख हैं। 

विश्व जल दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की ताजा रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गैर-टिकाऊ तरीके से पानी की निकासी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। साथ ही इन क्षेत्रों में तेजी से होते शहरीकरण, बढ़ती आबादी और उद्योगों के दबाव व विभिन्न क्षेत्रों के बीच पानी को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम साबित हो सकती है। 

यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक एशिया और प्रशांत क्षेत्र में कुछ देश ताजे जल की आपूर्ति के लिए गैरवाजिब तरीके से पानी की निकासी कर रहे हैं। कुल जल की उपलब्धता में आधे से ज्यादा की निकासी कुछ देशों द्वारा ही की जा रही है। मसलन एशिया और प्रशांत क्षेत्र में भारत और चीन समेत 7 देश ऐसे हैं जो दुनिया में 15 भू-जल निकासी वाले शीर्ष देशों में शामिल हैं।   

पानी इस क्षेत्र के लिए बेहद ही मूल्यवान संसाधन है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों के कारण जलसंकट की समस्या इन क्षेत्रों में और अधिक गहरी हो सकती है। साथ ही प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता का स्तर भी कम हो सकता है। इन क्षेत्रों में पानी का प्रदूषण भी बहुत ज्यादा गौर किया गया है। इन क्षेत्रों में विकासशील देशों से 80 फीसदी से ज्यादा दूषित या गंदा जल पैदा होता है। हालांकि ऐसे गंदे जल को दोबारा इस्तेमाल लायक नहीं बनाया जा सका है। यह पूरी तरह बर्बाद हो जाता है। 

यूएन रिपोर्ट के मुताबिक एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों में खासतौर से औद्योगिक क्षेत्रों में यह तत्काल जरूरत है कि गंदे या दूषित जल को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाए जाने की पहल की जाए।