संसद में आज: केन-बेतवा लिंक परियोजना से 62 लाख लोगों को मिलेगा पीने का पानी

दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में सल्फर और क्लोरीन का उच्च स्तर

By Madhumita Paul, Dayanidhi

On: Thursday 02 December 2021
 

केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी हो चुकी है। विस्तृत डीपीआर के अनुसार, केबीएलपी के तहत कुल वार्षिक सिंचाई 10.62 लाख हेक्टेयर है, जिसमें मध्य प्रदेश में 8.11 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 2.51 लाख हेक्टेयर शामिल हैं। केबीएलपी का उद्देश्य मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर, दमोह और दतिया जिलों और बुंदेलखंड क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिलों को लाभ पहुंचाना है। यह जानकारी आज जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में दी।

शेखावत ने कहा कि इस परियोजना में क्षेत्र की लगभग 62 लाख आबादी को पेयजल आपूर्ति के प्रावधान की भी परिकल्पना की गई है।

तेलंगाना राज्य के जल प्रदूषण के आंकड़े

जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (डब्ल्यूक्यूएमआईएस) पर तेलंगाना राज्य द्वारा वर्ष 2021-22 के दौरान परीक्षण किए गए 174,725 नमूनों में से, 411 नमूने दूषित पाए गए, यह आज जल शक्ति राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने लोकसभा में बताया।

पटेल ने कहा 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता और नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पीने योग्य नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान किया गया है। इसके लिए अगस्त, 2019 से, भारत सरकार, राज्यों के साथ साझेदारी में, जल जीवन मिशन (जेजेएम) पानी की गुणवत्ता प्रभावित बस्तियों सहित हर घर जल, को लागू कर रही है।  

अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण या रीसाइक्लिंग के लिए कार्यक्रम

लोक सभा में एक सवाल पूछा गया था कि "क्या सरकार को पता है कि कोविड महामारी के दौरान 25000 टन से अधिक कचरा महासागरों में प्रवेश कर गया है, जिससे मानव जीवन को खतरा है" इसके जवाब में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री कौशल किशोर ने लोक सभा में बताया कि ऐसा कोई मामला सरकार के संज्ञान में नहीं आया है।

किशोर ने कहा कि 1 अक्टूबर, 2021 को शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) 2.0 के तहत, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) के तहत राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को 10,168 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

कंप्रेस्ड बायो गैस

अक्टूबर 2018 से नवंबर 2021 के बीच, सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन (एसएटीएटी) पहल के तहत स्थापित 16 सीबीजी प्लांट्स से कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) की आपूर्ति शुरू की गई है। यह आज पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने लोकसभा में बताया। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में एसएटीएटी में भाग लेने वाली तेल और गैस विपणन कंपनियों ने उद्यमियों से लगभग 3511 टन कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) की खरीद की है।

शहरों में बढ़ती आवासीय पानी की मांग

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की वेबसाइट पर पोस्ट की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, वाटर रिस्क फिल्टर, जो पानी की कमी वाले स्थानों की गंभीरता का मूल्यांकन करने के लिए एक ऑनलाइन उपकरण है, का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया के 100 शहर पानी की सबसे अधिक मांग में वृद्धि का सामना कर रहे होंगे। उन 100 शहरों में भारत के 30 शहरों की पहचान की गई है जो अगले कुछ दशकों में पानी की कमी के बढ़ते जोखिम का सामना करेंगे, यह जानकारी आज आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री कौशल किशोर ने लोकसभा में दी।

ग्रामीण क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)

मार्च, 2021 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक देश के शहरी क्षेत्रों से सीवेज उत्पादन 72,368 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) होने का अनुमान है, जिसके मुकाबले 31,841 एमएलडी की सीवेज उपचार क्षमता प्रथम दर्जे के शहर और दूसरे वर्ग (टियर-2) शहर में उपलब्ध है, यह आज जल शक्ति राज्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने लोकसभा में बताया।

बाघों की गिनती के लिए 'टाइगर काउंट' ऐप का विकास

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से अखिल भारतीय बाघ अनुमान-2022 के चरण में सहायता के लिए "एम-स्ट्रिप्स" (बाघों की गहन सुरक्षा और पारिस्थितिक स्थिति के लिए निगरानी प्रणाली) ऐप विकसित किया है, यह आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में बताया।

चौबे ने कहा पारिस्थितिक ऐप को विकसित करने की लागत जिसमें अधिभोग आधारित भू-संदर्भित संकेत सर्वेक्षण, लाइन ट्रांजेक्ट आधारित दूरी नमूनाकरण, वनस्पति मात्रा का ठहराव, मानव गतिविधि आदि की गणना के लिए लगभग 3.52 लाख रुपये की राशि रखी है।

दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में सल्फर और क्लोरीन का उच्च स्तर

सरकार ने "एसिड एरोसोल" के गठन को बढ़ाने वाले सल्फर, एमाइन और क्लोरीन के स्तर पर दिल्ली और एनसीआर के लिए कोई विशेष अध्ययन नहीं किया है। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के बिना उच्च सल्फर सामग्री वाले कारखानों में ईंधन जलाने से वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) का उच्च उत्सर्जन हो सकता है, जैसा कि आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में बताया।

चौबे ने कहा कि सरकार पहले ही कई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एसओ2 के उत्सर्जन की सीमा निर्धारित कर चुकी है।

वैश्विक मीथेन संकल्प

भारत वैश्विक मीथेन संकल्प का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। 17 सितंबर, 2021 को ऊर्जा और जलवायु पर मेजर इकोनॉमीज फोरम (एमईएफ) में यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा संकल्प का प्रस्ताव रखा गया था, जिसका लक्ष्य 2030 तक 2020 के स्तर से वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में 30 फीसदी की कमी करना था, यह आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यसभा में बताया।

भारत जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) और इसके पेरिस समझौते का एक पक्षकार है। यादव ने कहा कि भारत यूएनएफसीसीसी और उसके पेरिस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है, ताकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उसके कार्यों को तैयार किया जा सके और उसे लागू किया जा सके।