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दुनिया की 31 फीसदी ओक प्रजातियों पर मंडरा रहा है विलुप्त होने का खतरा

दुनिया भर में ओक की 31 फीसदी प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है, जिसके लिए जलवायु परिवर्तन, कीटों, कृषि, जंगलों के विनाश और शहरीकरण को जिम्मेवार माना जा रहा है

By Lalit Maurya

On: Friday 11 December 2020
 

द मॉर्टन अर्बोरटम और इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के ग्लोबल ट्री स्पेशलिस्ट ग्रुप द्वारा जारी नई रिपोर्ट द रेड लिस्ट ऑफ ओक्स 2020 से पता चला है कि दुनियाभर में ओक की करीब 31 फीसदी प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। इस रिपोर्ट में पहली बार दुनिया की 430 ओक प्रजातियों के वितरण, पेड़ों की संख्या और उसपर मंडरा रहे खतरों के बारे में जानकारी दी गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस रिपोर्ट की मदद से ओक के वृक्षों के संरक्षण में मदद मिलेगी। 

शोधकर्ताओं के अनुसार एक तरफ जहां 31 फीसदी ओक प्रजातियों पर विलुप्ति का खतरा है वहीं साथ ही करीब 41 फीसदी (217) को संरक्षण की जरुरत है। यदि इस प्रजाति पर मंडरा रहे विलुप्त होने के खतरे की बात करें तो वह स्तनधारी जीवों (26 फीसदी) और पक्षियों (14 फीसदी) से भी कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा चीन में मौजूद ओक प्रजातियों पर खतरा है वहां इसकी करीब 36 प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है। इसके बाद मेक्सिको (32 प्रजातियां), वियतनाम (20) और संयुक्त राज्य अमेरिका (16) का नंबर आता है। भारत में भी ओक की करीब 21 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 4 संकटग्रस्त हैं। 

किस कारण विलुप्त हो रहे हैं यह पेड़ 

वैज्ञानिकों द्वारा ओक पर मंडरा रहे खतरों के विश्लेषण से पता चला है कि अमेरिका में इसके विलुप्त होने के लिए जलवायु परिवर्तन, आक्रामक कीट और रोग मुख्य रूप से जिम्मेवार हैं, जबकि दक्षिण पूर्व एशिया में कृषि, शहरीकरण और जंगलों का विनाश मुख्य रूप से जिम्मेवार हैं। भारत में कृषि के चलते यह पेड़ खतरे में है। 

बॉटनिक गार्डन कंजर्वेशन इंटरनेशनल (बीजीसीआई) के महासचिव पॉल स्मिथ के अनुसार अकेले ब्रिटेन में पक्षी, काई, कवक, कीड़े, लाइकेन और स्तनधारी जीवों की करीब 2300 प्रजातियां भोजन और आश्रय के लिए देशी ओक पर निर्भर हैं। यही बात ओक की अन्य प्रजातियों पर भी लागु होती है। ऐसे में यदि इसकी एक भी प्रजाति विलुप्त होती है तो उसका खामियाजा सैकड़ों अन्य प्रजातियों को भी उठाना पड़ेगा। 

ओक को बांज, बलूत या शाहबलूत के नाम से भी जाना जाता है। इसकी लगभग 400 से भी ज्यादा ज्ञात किस्में हैं, जिनमें कुछ की लकड़ियां बड़ी मजबूत और रेशे सघन होते हैं। यही वजह है कि इसका उपयोग फर्नीचर और निर्माण में भी होता है। इस पेड़ की पहचान इसके पत्तों और फलों से होती है। इसके पत्ते खांचेदार और फल सामान्यत: गोल और ऊपर की ओर नुकीले होते हैं। आमतौर पर यह पेड़ पूर्व में मलेशिया से हिमालय और काकेशस होते हुए, सिसिली से लेकर उत्तर के ध्रुवीय क्षेत्र के साथ-साथ उत्तरी अमेरिका और भारत में भी पाया जाता है।