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महुए से तैयार हेरिटेज ड्रिंक से संवारेंगे आदिवासियों की जिंदगी : प्रवीर कृष्णा

आदिवासियों द्वारा हजारों सालों से उपभोग किए जाने वाले महुआ पेय को ट्राईफेड जल्द ही ‘हेरिटेज ड्रिंक' के नाम से शहरी बाजारों में उतारने की तैयारी कर रहा है

By Chaitanya Chandan

On: Wednesday 10 April 2019
 

Credit: Tarique Aziz

आदिवासियों द्वारा हजारों सालों से उपभोग किए जाने वाले महुआ पेय को ट्राईफेड जल्द ही ‘हेरिटेज ड्रिंक' के नाम से शहरी बाजारों में उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके माध्यम से आदिवासियों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार लाने की बात कही जा रही है। यह योजना क्या है और इसे जमीन पर उतारने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं, इन सभी पहलुओं पर ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राईफेड) के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्णा से बातचीत के अंश -

महुआ ड्रिंक को नए सिरे से लांच करने की बात कही जा रही है, क्या है यह पूरी परियोजना?

हमारे देश के आदिवासी समाज में हजारों साल से महुआ के फूलों का पेय पदार्थ बना कर पीने का चलन है। इसे महुआ ड्रिंक भी कहा जाता है। अब हमारी योजना है कि इसे हेरिटेज ड्रिंक के नाम से शहरी बाजारों में लाया जाए। इससे छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और आन्ध्र प्रदेश के आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है।

इस परियोजना से आदिवासियों को कैसे जोड़ा जाएगा?

इस परियोजना में हमलोग आदिवासियों के उसी ज्ञान का उपयोग कर रहे हैं, जो उनके पास हजारों सालों से है और जिसका वे परम्परागत तौर पर इस्तेमाल करते आए हैं। इस उत्पाद के लिए महुआ के फूलों के संग्रह, प्रसंस्करण और मार्केटिंग, सभी कार्य में आदिवासी समूहों की प्रमुख भागीदारी होगी। इस उत्पाद के लिए आवश्यक महुआ को आदिवासियों से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। फिलहाल महुआ का न्यूनतम समर्थन मूल्य भारत सरकार द्वारा 25 रुपए प्रति किलो तय किया गया है। महुआ ड्रिंक के उत्पादन और विपणन के हर स्तर पर आदिवासियों की भागीदारी होगी और इसके वितरण के काम में भी आदिवासियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। यह सारी कवायद आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करेगी। इससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

महुआ हेरिटेज ड्रिंक परंपरागत महुआ पेय से किस प्रकार अलग है?

आदिवासी जिस विधि से महुआ ड्रिंक बनाते हैं, उसी विधि को थोड़ा रिफाइन करके यह हेरिटेज ड्रिंक बनाया जाएगा। फिलहाल अपने देश में आदिवासियों को खुद के उपभोग के लिए महुआ ड्रिंक बनाने की अनुमति है। पारम्परिक महुआ पेय को शहरी बाजार में बेचने लायक बनाने के लिए हमने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर दो साल तक रिसर्च किया। इस रिसर्च के सार्थक परिणाम आए और हमने अनार, अदरख और अमरूद फ्लेवर्स के साथ हेरिटेज महुआ ड्रिंक बनाने में सफलता प्राप्त की है। यह हेरिटेज ड्रिंक अपने मूल स्वाद से थोड़ा मृदु होगा, जिससे कि इसे शहरी बाज़ार में आसानी से उपभोग के लिए प्रस्तुत किया जा सके। इस हेरिटेज ड्रिंक में अल्कोहल की मात्रा 5 से 30 प्रतिशत तक होगी।

क्या इसके उत्पादन के लिए ट्राईफेड ने कोई प्लांट स्थापित किया है?

ट्राईफेड ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के तलूजा में प्लांट स्थापित किया है। इस प्लांट में महुआ हेरिटेज ड्रिंक के साथ ही अन्य वनोपजों का प्रसंस्करण कर 15-20 उत्पादों को तैयार किया जाएगा, जिनमें इमली की चटनी, आमचूर आदि शामिल हैं। इस परियोजना की कुल लागत करीब 16 करोड़ रुपए है।

महुआ पेय मद्य की श्रेणी में आता है। इसे खुले बाजार में आप कैसे बेचेंगे?

इसके लिए हम इसके उत्पादन के लिए सभी जरूरी लाइसेंस (जैसे राज्य सरकारों के आबकारी विभाग, भारतीय खाघ संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, पर्यावरणीय मंजूरी, स्थानीय प्रशासन की मंजूरी आदि) प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। अभी ट्राईफेड के देशभर में 104 विक्रय केंद्र हैं। इन सभी विक्रय केंद्रों पर यह महुआ हेरिटेज ड्रिंक उपलब्ध रहेगा।

महुआ हेरिटेज ड्रिंक को प्रमोट कैसे करेंगे?

हम लोग इस उत्पाद को ‘आदिवासी गौरव’ के नाम पर प्रमोट करेंगे। साथ ही, हम राज्य सरकारों से इसे हेरिटेज ड्रिंक के तौर पर प्रमोट करने के लिए आग्रह करेंगे। हम लोग गोवा की एक कम्पनी डेज्मंड नजरेथ से साझेदारी कर रहे हैं, जो हमारे नॉलेज पार्टनर रहेंगे। साथ ही उत्पादन और प्रमोशन में भी हमारी मदद करेंगे।

यह उत्पाद कब तक लांच करने की योजना है?

हमारा उत्पादन का काम शुरू हो चुका है, लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण इसे अभी लांच कर पाना सम्भव नहीं हो पा रहा है। हम आशा करते हैं कि जून के महीने से इसे बाजार में लांच कर देंगे।