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पिराना डंपिंग साइट के लिए 75 करोड़ रुपए देगी सरकार, एनजीटी का आदेश

एनजीटी ने गुजरात सरकार और अहमदाबाद नगर निगम को शहर के कचरे के पहाड़ की समस्या के निकाल के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है

 
Last Updated: Monday 08 July 2019
Photo: Kaleem Siddiqui
Photo: Kaleem Siddiqui Photo: Kaleem Siddiqui

अहमदाबाद से कलीम सिद्दीकी 

अहमदाबाद स्थित पिराना डंपिंग साइट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वायु प्रदूषण का बड़ा कारण मानते हुए गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि पिराना डंपिंग साइट के हल के लिए सरकार एस्क्रो अकाउंट में 75 करोड रुपये जमा कराए। एनजीटी ने गुजरात सरकार और अहमदाबाद नगर निगम को शहर के कचरे के पहाड़ की समस्या के निकाल के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है।  

एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श गोयल पिराना डंपिंग की स्थिति को भयनाक बताते हुए कहा " इस के हल की दिशा में तेज़ी से काम करने की आवश्यकता है " जस्टिस गोयल ने दो सप्ताह में ठोस योजना बनाकर एक महीने के भीतर कचरे के पहाड़ को साफ करने के कार्य शुरू करने को कहा है एस्क्रो खाते में 75 करोड जमा करने के अलावा इस भयनाक परिस्थि से निपटने के लिए एक समिति की रचना करने को कहा है ताकि एक्शन प्लान बनाकर अमल किया जा सके।  इस समिति में चीफ सेक्रेटरी, आर्थिक एंव शहरी विकास सचिव, म्युनिसिपल कमिश्नर, शहरी विकास अथॉरिटी के सीईओ, केन्द्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय डायरेक्टर और राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्य को शामिल करने को कहा है 
 
इस निर्णय से पहले मार्च महीने में पिराना डंपिंग को हटाने की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए गुजरात हाई कोर्ट के जस्टिस एसआर ब्रह्मभट्ट और जस्टिस वीबी कायानी ने अहमदाबाद नगर निगम के आभाववादी दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था " आप को समझना चाहिए शहर का सौंद्रीकरण तब तक संभव नहीं है जब तक शहर की साफ सफाई सुनिश्चित नहीं कर दी जाती यह कचरे का पहाड़ बड़ा अवरोध है आप को बता दें भारत स्वछ अभीयान के सर्वे में अहमदाबाद शहर को छठा स्थान मिला है जबकि पिछले वर्ष बारहवें स्थान पर था छ पायदान की छलांग को नगर निगम बड़ी उपलब्धि मानता है
 
वर्ष 2016 में अहमदाबाद के ही सामजिक कार्यकर्ता कलीम सिद्दीकी द्वारा पिराना कचरे के पहाड़ को हटाने तथा वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए गुजरात हाई कोर्ट में याचिका की गई थी यह टिप्पणी इसी याचिका को सुनते समय आई है कोर्ट ने अहमदाबाद नगर निगम के वकील को 4 दशक पुराने डंपिंग स्टेशन को बंद करने तथा वैकल्पिक साइट विकसित करने की योजना को 15 अप्रैल तक साफ करने को कहा था जिसके बाद सिविक अथॉरिटी द्वारा कचरे को अलग करने की प्रक्रिया शुरू करने के अलावा गयास पुर में नई डंपिंग साइट का कार्य शुरू हो गया। एबलॉन क्लीन एनर्जी को एएमसी ने कचरे का अलगाव करने तथा खाद बनाने का ठेका दिया है साइट सुपरवाईज़र मयूर वेगड़ा ने बताया " कचरे के अलगाव के लिए अभी दो मशीनें कार्य कर रही हैं 35 से 40 और मशीनें लगाने की कंपनी की योजना है जिसके लिए पैड बन रहे हैं " 
 
वन एंव पर्यवरण विभाग द्वारा रचित निमाबेन आचार्या समिति ने अप्रैल 2018 में गुजरात विधान सभा में रिपोर्ट रखी थी जिस में कहा गया था "पिराना डंपिंग साइट पर क्षमता से तीन चार गुना अधिक कचरा डंप किया जा चुका है इस डंपिंग साइट के कारण वायु ही नहीं अंडर ग्राउंड वॉटर भी दूषित हो चुका है दूषित पानी के कारण डंपिंग साइट के आस पास बसने वाले नागरिक कई प्रकार की बीमारियों की जकड़ में हैं समिति सिफारिश करती है पिराना डंप साइट को तत्काल प्रभाव से बंद कर देना चाहिए"
 
डंपिंग स्टेशन के नजदीक बसे सिटीजन नगर के नदीम सैय्यद कहते हैं " कोर्ट की टिप्पणी और ट्रिब्यूनल का निर्णय हमारे लिए वरदान है अब हमें आशा है यह पहाड़ हटेगा और स्वस्थ वायु मिलेगी" लोकल पार्षद शहज़ाद खान कहते हैं यह एक बहुत बड़ी समस्या थी जिससे लोग बहुत परेशान थे हमारी योजना थी कि इस डंपिंग साइट को हटाने के लिए एक आन्दोलन किया जाए, परंतु अब एनजीटी के निर्णय के बाद किसी आन्दोलन की आवश्यकता नहीं है हम निर्णय का स्वागत करते हैं और इस कार्य में नगर निगम को सहयोग देंगे "
 
वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के अनुसार डंपिंग साइट के 200 मीटर के दायरे में बस्ती और नेशनल हाईवे नहीं होना चाहिए परंतु यह डंपिंग स्टेशन धोराजी सोसायटी और सिटीजन नगर से सटा हुआ है चंद मीटर की दूरी पर नेशनल हाईवे नंबर आठ है 20 किलोमीटर के अंदर एअरपोर्ट या हवाई पट्टी नहीं होना चाहिए लेकिन 16 किलो मीटर की दूरी पर सरदार वल्लभ भाई पटेल एयरपोर्ट है डंपिंग स्टेशन के असपास की बस्ती में किडनी, साँस की बीमारी, टीबी, गर्भपात जैसी बीमारियां आम हैं अहमदाबाद की यह डंपिंग साइट की माफ दंड पर खरी नहीं थी फिर भी लंबे समय से सिविक अथॉरिटी चला रही थीं लेकिन अब एनजीटी और हाई कोर्ट के हस्ताक्षेप के बाद एक आशा है कि तीन चार वर्षों में यह डंपिंग स्टेशन पूर्णतः बंद कर दिया जाएगा। 

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